अमेरिका, इजराइल और ईरान के बीच जारी संघर्ष का असर अब भारत में भी दिखाई देने लगा है। युद्ध शुरू हुए अभी एक सप्ताह ही हुआ है, लेकिन इसके बावजूद घरेलू और व्यावसायिक गैस सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
ईरान-अमेरिका युद्ध का असर: भारत में गैस सिलेंडर महंगा, आगे और बढ़ सकती है महंगाई
भारत में पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतें तेल और गैस कंपनियां तय करती हैं। देश अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा रूस, अरब देशों और वेनेजुएला जैसे देशों से आयात करता है। इसके अलावा भारत अपनी करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा जरूरतें ईरान और खाड़ी देशों से पूरी करता है।
मौजूदा युद्ध के कारण भारत के एक हजार से अधिक तेल टैंकर ओमान और आसपास के समुद्री क्षेत्रों में फंसे हुए बताए जा रहे हैं। ऐसे में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है, जिसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ रहा है।
घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडर के दाम बढ़े
तेल कंपनियों ने घरेलू गैस सिलेंडर की कीमत में लगभग 60 रुपये की बढ़ोतरी की है। वहीं व्यावसायिक गैस सिलेंडर करीब 115 रुपये तक महंगा हो गया है। हालांकि भारत जैसे बड़े देश में अलग-अलग क्षेत्रों में इन कीमतों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

वैश्विक तनाव से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बयान में कहा है कि अमेरिका इस युद्ध को लेकर जल्दबाजी में नहीं है और यदि तेल और गैस की कीमतें बढ़ती हैं तो इससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।
लेकिन भारत सहित दुनिया के कई देश बड़े पैमाने पर तेल और गैस आयात करते हैं। ऐसे में ईरान और खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल और गैस की कीमतों पर दबाव बढ़ गया है। इसका असर भारत की पेट्रोलियम कंपनियों पर भी पड़ रहा है।
रूस से आयात पर भी दबाव
भारत रूस से भी बड़ी मात्रा में तेल और गैस खरीदता है। हालांकि अमेरिका द्वारा लगाए गए संभावित 100 प्रतिशत टैरिफ की चेतावनी और वैश्विक दबाव के कारण रूस से आयात को लेकर भी स्थिति संवेदनशील बनी हुई है। भारत सरकार ने हालांकि स्पष्ट किया है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जहां से भी आवश्यक होगा, वहां से तेल और गैस की खरीद करेगा।
पेट्रोल-डीजल भी हो सकते हैं महंगे
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक तनाव लंबा चलता है तो गैस सिलेंडर के बाद पेट्रोल और डीजल की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। भारत में इन पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों का निर्धारण मुख्य रूप से तेल कंपनियां करती हैं, जबकि सरकार टैक्स में राहत देकर उपभोक्ताओं को कुछ राहत दे सकती है।
गरीब और दिहाड़ी वर्ग पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर
महंगाई बढ़ने का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ता है जो दिहाड़ी मजदूरी या रोजाना काम करके अपनी जरूरतें पूरी करते हैं। भारत की लगभग 30 प्रतिशत आबादी इसी वर्ग में आती है।
अगर पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतें बढ़ती हैं तो परिवहन से लेकर रोजमर्रा की वस्तुओं तक सभी चीजें महंगी हो जाती हैं। इसका सीधा असर आम लोगों, खासकर गरीब वर्ग की जेब पर पड़ता है।
आने वाले समय में बढ़ सकते हैं महंगाई के झटके
वैश्विक हालात को देखते हुए विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में महंगाई के और झटके लग सकते हैं। इसलिए सरकार और बाजार दोनों के फैसलों पर देशभर की नजर बनी हुई है।
(सम्पादकीय: अजय तिवाड़ी)
